2026 में फिर लौटेगा अल-नीनो, मानसून और खेती पर पड़ेगा बड़ा असर! भारतीय मौसम विज्ञान विभाग (IMD) ने अल-नीनो को लेकर एक महत्वपूर्ण अपडेट जारी किया है, जिसका सीधा असर आने वाले समय में खेती और मौसम पर पड़ सकता है। विभाग के अनुसार, जुलाई से सितंबर 2026 के बीच प्रशांत महासागर में अल-नीनो के सक्रिय होने की प्रबल संभावना है। हालांकि, मौसम वैज्ञानिकों का कहना है कि अभी किसी निश्चित निष्कर्ष पर पहुंचना जल्दबाजी होगी, क्योंकि फरवरी में आने वाले ‘स्प्रिंग बैरियर’ के बाद ही मार्च के डेटा से सटीक भविष्यवाणी की जा सकेगी।
किसानों के लिए चिंता की बात यह है कि अगले तीन महीनों यानी जनवरी से मार्च के दौरान उत्तर-पश्चिमी भारत के सिंचित क्षेत्रों में सामान्य से कम बारिश होने का अनुमान है। पंजाब, हरियाणा, राजस्थान और पश्चिमी उत्तर प्रदेश जैसे प्रमुख गेहूं उत्पादक राज्यों में बारिश की कमी के कारण किसानों को सिंचाई पर अधिक खर्च करना पड़ सकता है। हालांकि, जनवरी के दौरान मध्य और पूर्वी भारत में शीत लहर के दिनों में बढ़ोतरी हो सकती है, जो गेहूं, सरसों और चना जैसी फसलों के लिए फायदेमंद साबित हो सकती है।




















